VNIT में एक दिवसीय सामाजिक इंटर्नशिप कार्यशाला
उन्नत भारत अभियान (UBA) के अंतर्गत ‘सामाजिक इंटर्नशिप’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 7 मार्च को VNIT परिसर स्थित मल्टी एक्टिविटी सेंटर मेंकिया गया। इस कार्यक्रम मेंपूर्व विदर्भ के छह जिलों से(नागपुर, भंडारा, गोंदिया, गडचिरोली, चंद्रपुर और वर्धा) 350 से अधिक महाविद्यालयीन विद्यार्थी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम मेंकुल 50 से अधिक महाविद्यालयों ने सहभागिता दर्जकी।
यह कार्यक्रम स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) विद्यार्थियों के लिए नियोजित है, जिसके माध्यम से उन्हें ग्रामीण समुदायों, विशेष रूप सेपूर्व विदर्भ के आदिवासी समाज के साथ संवाद स्थापित करने, उन्हेंसमझने और उनके साथ प्रत्यक्ष रूप से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस सामाजिक इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थी गांवों का दौरा करेंगे, वहां पांच सेपंद्रह दिन तक ग्रामवासियों के साथ रहेंगे और ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करेंगे। VNIT नेपूर्व विदर्भ मेंकार्यरत 20 से अधिक स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) के साथ इस कार्यक्रम के लिए समझौता किया है। विद्यार्थी इन स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर गांवों में प्रत्यक्ष काम करेंगे और येसंस्थाएं उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन व सहयोग प्रदान करेंगी।
यह एक दिवसीय कार्यशाला सुबह 11 बजे आरंभ हुई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वनवासी कल्याण आश्रम (VKA) के अखिल भारतीय युवा आयाम प्रमुख श्री वैभवजी सुरंगेथे। अपनेप्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने आदिवासी समाज के उत्थान के बारेमेंसोचनेसे पहले उनकी संस्कृति की सम्यक समझ विकसित होना कितना महत्त्वपूर्ण है, इस पर विशेष बल दिया। उन्होंनेयह भी स्पष्ट किया कि विकास की अवधारणा के बारेमें हमें नए सिरेसेसोचनेकी आवश्यकता है। अपने भाषण में आगे उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी एक स्वतंत्र संस्कृति और पहचान है, और यदि हम अपने विकास मॉडल को उन पर थोपने का प्रयास करेंगे तो इससे उनके साथ-साथ प्रकृति तथा अंततः पृथ्वी को भी नुकसान हो सकता है। उन्होंनेविद्यार्थियों सेकुछ दिन आदिवासी गांवों में रहकर उनकी जीवन शैली का गहराई से अवलोकन करनेका आह्वान किया।
कार्यकारी निदेशक एवं अनुसंधान अधिष्ठाता (Dean R&C) प्रो. यशवंत कटपताल ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों सेइस इंटर्नशिप में ईमानदारी सेभाग लेनेका आग्रह किया। उन्होंनेकहा कि जनरेशन-ज़ेड (Gen- Z) पर समाज के लिए सार्थक योगदान देने और ग्राम-स्तर की समस्याओं का समाधान खोजने की बड़ी जिम्मेदारी है। ग्रामीण समुदायों के साथ निकटता से काम करने से विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं का वास्तविक बोध होगा और वे अपनेज्ञान का उपयोग व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान के लिए कर सकेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से इस अवसर को विकसित भारत की व्यापक दृष्टि मेंयोगदान देने की दिशा में उठाया गया एक महत्त्वपूर्णकदम माननेका सुझाव दिया।
विद्यार्थी कल्याण अधिष्ठाता (Dean SW) प्रो. उमेश देशपांडेने उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित कर अपनेप्रेरक उद्बोधन से उन्हें प्रोत्साहित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के उस का लाभ उठानेका आग्रह किया, जिसके अंतर्गत इंटर्नशिप के लिए शैक्षणिक क्रेडिट प्रदान किए जाते हैं। UBA के क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. भूषण राजपाठक ने इस कार्यशाला का आयोजन किया था। कार्यक्रम की प्रस्तावना में उन्होंनेUBA की भूमिका, इसके मूलभूत सिद्धांत तथा इस कार्यशाला की समग्र अवधारणा के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। युथ फॉर सेवा (प्रवीण कुठे), स्नेहांचल (देवयानी घरोटे), ग्लोबल अभ्युदय विलेज – खापा (सचिन देशपांडे), रोल फाउंडेशन – अहेरी (प्रदीप देशमुख) और गरज फाउंडेशन (कॉलेज विद्यार्थी) जैसी विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं ने अपने-अपनेकार्यों की जानकारी विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत की। कूल १८ सेवाभावी संस्थाओं ने स्टॉल लगाकर अपने कार्य का प्रदर्शन कीया। कार्यक्रम मेंविद्यार्थियों के लिए विशेष गतिविधियों का भी समावेश किया गया, जिनके माध्यम सेसामाजिक इंटर्नशिप के लिए 50 विद्यार्थियों का चयन किया गया। कार्यक्रम का समापन शाम 5 बजे प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ।